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लोकसभा चुनावों में दोबारा बहुमत पाने को लेकर इतने आश्वस्त क्यों हैं PM मोदी?

नई दिल्ली 17 अप्रैल 2019 । प्रधानमंत्री ने सोमवार को दूरदर्शन को दिए एक इंटरव्यू में पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि के लिए ‘समर्थन की अभूतपूर्व लहर’ है। उन्होंने कहा कि इस तरह का समर्थन उन्होंने 2014 के चुनावों में भी नहीं देखा था। मोदी ने खासतौर से उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि वहां विरोधी दल इतने डरे हुए हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने का विकल्प चुनना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि राहुल को अपने परिवार की पारंपरिक सीट अमेठी से भी जीत का भरोसा नहीं था।

प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के नतीजों के बारे में भी काफी आश्वस्त दिखे। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने बीजेपी का समर्थन करने का मन बना लिया है। मोदी ने राफेल विमान सौदे, राष्ट्रवाद, वंशवादी राजनीति और सेना के राजनीतिकरण को लेकर लग रहे आरोपों पर भी बात की। उन्होंने कहा, कोई व्यक्तिगत तौर पर उनका विरोध करे यह समझ में आता है, लेकिन यदि कोई उनका विरोध करते हुए राष्ट्रहित के खिलाफ काम करना शुरू कर दे और देश के विरोध में बोलने लगे तो यह अस्वीकार्य होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह राफेल सौदे को लेकर फैलाए जा रहे झूठ को समझ सकते हैं, लेकिन उन्हें चिंता इस बात की है कि आखिर कांग्रेस जैसी 134 साल पुरानी पार्टी को इसका सहारा क्यों लेना पड़ा। मोदी ने कहा कि किसानों की आत्महत्या की तरह सैनिकों की शहादत और राष्ट्रवाद भी एक चुनावी मुद्दा है। उन्होंने कहा, ‘पिछले 40 वर्षों से देश आतंकवाद से पीड़ित है, और मैं यह नहीं समझ पाता कि हम इस मुद्दे को चुनावों में क्यों नहीं उठा सकते। यदि हम लोगों को इस मुद्दे पर अपने विचार नहीं बता सकते, तो ऐसा करने के पीछे तर्क क्या है?’

उन्होंने कहा, ‘क्या कोई भी देश राष्ट्रवाद की भावना के बिना आगे बढ़ सकता है? जिस देश में हजारों सैनिक शहीद हुए हैं, क्या वहां इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनना चाहिए? यदि किसान मरते हैं तो यह एक चुनावी मुद्दा है, और अगर सैनिक मरते हैं तो इसे चुनावी मुद्दा नहीं होना चाहिए? ऐसा कैसे हो सकता है?’ राफेल पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनता अब सच्चाई जान चुकी है और झूठ उजागर हो गया है। उन्होंने कहा, ‘वह राहुल अपने पिता बोफोर्स मुद्दे में के ‘पापों को धोने के लिए’ राफेल मुद्दा उठा रहे हैं।’

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वंशवादी राजनीति के मुद्दे को उठाकर वह भारत के लोगों को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि भारतीय राजनीति के लिए यह कितनी खतरनाक है। जैसा कि मैंने पहले ही कहा है कि मोदी ने शुरू से ही अपनी रैलियों में राष्ट्रवाद के मुद्दे को उठाकर मतदाताओं की नब्ज को महसूस किया है। उन्हें उम्मीद है कि यदि उनकी पार्टी बेहतर नहीं भी कर पाई, तो कम से कम 2014 के नतीजे तो दोहरा ही देगी। इसके लिए हमें 23 मई को आने वाले फैसले का इंतजार करना होगा।

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