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मध्यप्रदेश में क्यों नहीं मिलता युवाओं को रोजगार : कमलनाथ

भोपाल 7 नवम्बर 2018 । प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि सब युवा मिलकर शिवराजसिंह सहित भाजपा नेताओं से पूछ रहे हैं कि हमारी नौकरियां कहां गयीं?
कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सिंह ने ऐसे ऐसे कारनामें किये हैं कि बेरोजगारी कई गुना बढ़ गयी है। पांव-पांव वाले भैय्या शिवराजसिंह के कांव-कांव कर झूठ बोलने के कारण आज 23 लाख युवा बेरोजगार हैं। जब युवाओं को नौकरी नहीं दे पाये तो उनसे कहा बैंक से लोन ले लो। सरकारी नौकरियां आरएसएस से जुड़े लोगों को दे दी। अभी हाल ही में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के पांच सौ समन्वयकों को चुपके से नौकरी में रख लिया। ये लोग भाजपा के और आरएसएस के कार्यकर्ता हैं।
कमलनाथ ने कहा कि शिक्षकों की जरूरत होते हुए भी पांच सालों में भर्ती नहीं निकाली। आचार संहिता लगने के ठीक पहले भर्ती का विज्ञापन निकाला। जल्दी में निकाले गये इस विज्ञापन में विसंगतियां भी हैं। कई युवा आयु सीमा पार कर गये और आवेदन तक नहीं कर पाये। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को आयु सीमा में दी जाने वाली छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
नाथ ने कहा कि प्रदेश में कोई उद्योग नहीं लगे, सिर्फ बातें हुई हैं। स्थानीय युवा बेरोजगार रह गये। व्यापमं से होने वाली परीक्षाओं में घपलेबाजी से हजारों युवाओं का भविष्य खराब को गया। आश्चर्य की बात तो यह है कि भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता इन युवाओं की बात नहीं करता। उन्होंने कहा कि भाजपा का काम करने वाले रिटायर हो चुके अधिकारियों, कर्मचारियों को सेवानिवृत्त होने के बाद भी पुनः संविदा में रख लिया। युवाओं के रोजगार के मौके खत्म कर दिये। इसलिये सब युवा मिल कर पूछ रहे हैं कि मामा, हमारी नौकरियां कहां गयी?

किसान विरोधी है देश-प्रदेश की भाजपा सरकारें

मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार किसानों से अपराधियों जैसा व्यवहार करती है। फसलों के दाम मांगने पर किसानों के सीने में गोलियां उतार देती है और मोदी सरकार बर्बरतापूर्वक अन्नदाता को लहु-लुहान कर देती है। शिवराज सरकार की बर्बरता का आलम तो यह है कि वह किसानों के साथ र्दुदांत आतंकियों जैसा व्यवहार करती है और किसानों के मासूम बच्चों और किसानों को गोलियां मारकर मौत के घाट उतार देती है। इतना ही नहीं गोली मारने वालों को गले लगाती है और हत्यारों का साथ देती है।
मध्यप्रदेश का किसान अपनी फसलों के दामों के लिये दर-दर की ठोंकरें खाता है और प्रदेश का मुखिया अपने खेतों में करोड़ांे के अनार और फूल उगाता है। न उसे समर्थन मूल्य की दरकार है, न मंडियांे में अपनी फसल के बिकने का इंतजार। प्रदेश में एक भी किसान ऐसा नहीं, जिसका दूध साठ रूपये लीटर बिकता हो और मुखिया का ठाठ यह है कि साठ रूपये का दूध पूरी सरकारी अकड़ से बिक जाता है। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में किसानों के नाम की ऐसी कोई योजना नहीं है, जो भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ी हो।
(1) 3 अक्टूबर 2018 को मोदी सरकार द्वारा रबी सीज़न की 6 फसलों के लिए समर्थन मूल्य की घोषणा की गई और कहा गया कि किसानों को लागत का 50 प्रतिषत ऊपर दिया जा रहा है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल विपरीत है । किसानों को मुनाफा तो दूर, खेती में उनकी लागत भी बमुष्किल निकल पा रही है । सही मायने में जो मूल्यांकन स्वामीनाथन आयोग ने किया और जो राज्यों ने लागत मूल्य निकाल कर मोदी सरकार के कृषि मूल्य एवं लागत आयोग को सूचित किया, मोदी सरकार ने इन्हे नकार कर नाकाफी समर्थन मूल्य रबी सीज़न 2018-19 और रबी सीज़न 2019-20 के लिए घोषित किया।

प्रदेश ने रोये 1100 करोड़ के प्याज के आंसू –
प्याज खरीदी के नाम पर 1100 करोड़ रूपये का घोटाला हुआ। पहले तो किसानों से खरीद कर गोदामों में रखना बताया, फिर उस प्याज को सढ़ा हुआ बताकर सारा पैसा डकार गये। इतना ही नहीं, एक ऐसा उदाहरण भी सामने आया कि 62 करोड़ की प्याज खरीदी पर 44 करोड़ रूपये हम्माली और परिवहन पर खर्च बता दिया गया।
शिवराज सरकार ने 250 करोड़ के भ्रष्टाचार की दाल गलायी –
इसी प्रकार प्याज के बाद 250 करोड़ रूपये का दाल घोटाला सामने आता है। हद तो यह होती है कि हरदा जिले में 3.58 लाख टन मूंग दाल की खरीदी बतायी जाती है, जबकि सरकारी दस्तावेजों से पता लगता है कि इतनी बड़ी मात्रा में दाल वहां पैदा ही नहीं होती? 550 रूपये के समर्थन मूल्य पर दाल खरीदी जाती है। किसान सड़कों पर आंदोलन कर रहे होते हैं और किसानों के नाम पर बिचैलिये और जमाखोर अपनी दाल बेंच देते हैं। इतना ही नहीं नरसिंहपुर, हरदा जैसे मध्यप्रदेश में कई जिले हैं, जहां यह घोटाला किया गया है।
किसानों के खाने से भर लिया भाजपा ने भ्रष्टाचारी पेट –
मध्यप्रदेश की छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 500 मंडियों में किसानों का भोजन भी भ्रष्टाचारी भाजपा सरकार खा गई। किसानों को नाम मात्र शुल्क पर मंडियों में भोजन उपलब्ध कराने की योजना शिवराज सरकार लेकर तो आई, मगर उसका असली उद्देश्य अन्नदाता को भोजन परोसना नहीं, उनके भोजन के अधिकार का डांका डालना था। किसानों के भोजन के लिये बाकायदा कूपन मुद्रित कराकर किसानों को दिये जाने का प्रावधान है। मगर वह कूपन किसानों को देनेे की अपेक्षा भ्रष्टाचारी भाजपा सरकार अपनी जेब में रखती है और किसानों का हक खा जाती है। उदाहरण के लिये भोपाल से सटे नरसिंहगढ़ की मंडी का है, जहां 28 जुलाई 2016 को भ्रष्टाचार का यह मामला पकड़ में आया, उसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश भी हुए, मगर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। प्रदेश की अधिसंख्य मंडियों में यह शिकायत है कि पांच रूपये में किसानों को मिलने वाला यह भोजन भाजपा सरकार ठेकेदारों के साथ मिलकर खा जाती है और सैकड़ों करोड़ों रूपये का यह भोजन भाजपा सरकार हर साल खा जाती है।
कृषि पंपों की सब्सिडी से सींचा 50 हजार करोड़ का भाजपाई भ्रष्टाचारी खेत –
मध्यप्रदेश में सिंचाई के लिए प्रयुक्त में आने वाले लगभग 27 लाख पंप बगैर मीटर के हैं, जिसमें पूर्वी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीन 9 लाख, मध्य क्षेत्र में 6 लाख और पश्चिम में 12 लाख। शिवराज सरकार ने यह बताया है कि 1400 रु प्रति भ्च् फ़्लैट रेट से किसानों से पैसा लेते हैं और किसान 30 दिनों तक 10 घंटे रोज़ 8 माह कृषि पंप चलाता है और 1790 यूनिट ख़र्च होती है, और सरकार 4 रु 70 पैसे की दर से 5 भ्च् का बताती है कि 42065 रु. का बिल आता है तथा किसान से 1400 रु प्रति भ्च् के हिसाब से 5 भ्च् के 7000 रु. लिए जाते हैं और बाकी 35065 रु की सब्सिडी बताई जा रही है और इस प्रकार इस वर्ष 9000 करोड़ रु. का कृषि पंप की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। यह घोटाला बीते लगभग 10 वर्षों से चल रहा है और लगभग 50 हजार करोड़ रूपये की सब्सिडी का घोटाला हुआ है। पूरे प्रदेश ही क्या, पूरे देश मे ऐसी कोई खेती नहीं जिसमें लगातार 10 घंटे 8 माह तक रोज़ पानी दिया जाता हो। इसीलिए इन कृषि पम्पों के मीटर निकाल दिए गए हैं और किसानों के नाम पर यह सब्सिडी की लूट जारी है।

– सवाल नंबर सत्रह –

जो अपने संस्कारों और संस्कृति का नहीं रखते मान, वे बड़ों का नहीं करते सम्मान

प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराजसिंह से आज 40 दिन 40 सवाल पूछने की कड़ी में बुजुर्गों की पेंशन योजना को लेकर सत्रह वां सवाल पूछा।
1) मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री ने अपने 14 साल में वृद्ध महिलाओं के लिए एक भी वरिष्ठ नागरिक गृह नहीं खोले, जबकि देश के अनेक राज्यों ने अपने यहाँ ऐसे कई गृह चालू किये हैं जहाँ आश्रयहीन बूढ़ी माताएँ जाकर रह सकती हैं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी मध्यप्रदेश में केवल 10 ही वरिष्ठ नागरिक गृह हैं। कितने निर्दयी हैं शिवराज।
2) मुख्यमंत्री जी, केरल जैसे छोटे से राज्य में 532 आश्रय गृहों को संचालित करने के लिए सरकार फंड देती है। एमपी जैसे बड़े राज्य में केवल 67 आश्रय गृहों को ही सरकार क्यों मदद दे रही है?
3) पेंशन योजना महज दिखावा है। आप बताएं कि 300 रुपए, यानी हर दिन केवल दस रुपए की वृद्धावस्था पेंशन से किस बुजुर्ग का पेट भर सकता है? आप अपने एक दिन के भोजन पर कितना रुपया ख़र्च कर देते हैं? बताएं।
4) पहले बुजुर्गों को घर बैठे डाकिया पेंशन दे जाता था। आपने इसको सीधे बैंक खातों में कर दिया। इससे बुजुर्ग कितने ज़्यादा परेशान हैं, आधी से ज्यादा पेंशन तो 300 रु की पेंशन निकालने में ही ख़र्च हो जा रही है। क्या बुजुर्गों को परेशान करना ही आपका सुशासन है?
5) एकीकृत वृद्धजन कार्यक्रम हेतु मोदी सरकार ने एमपी में वर्ष 2014-15 में केवल तीन आश्रमों को 18 लाख़, वर्ष 15-16 में केवल चार आश्रमों को 28 लाख़, वर्ष 16-17 में चार आश्रमों को केवल 11 लाख की सहायता दी। क्या आप मोदीजी से वृद्धों के लिए माँग नहीं पा रहे हैं, या वे दे नहीं रहे हैं? जबकि आश्रय गृहों के लिए देश में 2132 लाख़ रुपए की सहायता दी जा रही है।
6) विधवा महिलाओं को आपने चुनावी फ़ायदे के लिए कल्याणी नाम दिया, पर कल्याणी के कल्याण के लिए क्या किया? प्रदेश में 21 लाख़ विधवा कल्याणी बुजुर्ग विधवा मातायें हैं, जो जीवन के साठ साल पूरे कर चुकी हैं। आप बताइये वह दस रुपए प्रतिदिन की पेंशन पर क्या अपना गुज़ारा कर लेंगी?
7) शिवराज जी, सबसे ज़्यादा वरिष्ठ नागरिकों पर अपराध आपके शासन में क्यों हो रहे हैं और सबसे ज़्यादा वरिष्ठ नागरिकों ने आपके शासन में आत्महत्या क्यों की है?

बहुजन समाज पार्टी के संजय वाजपेयी कांगे्रस में शामिल
निवाड़ी जिला पंचायत के पूर्व सदस्य एवं बहुजन समाज पार्टी के सदस्य संजय वाजपेयी आज कांग्रेस में शामिल हो गये। उन्होंने प्रदेश कांगे्रस कार्यालय पहुंचकर प्रदेश कांगे्रस के उपाध्यक्ष प्रकाश जैन की उपस्थिति में कांगे्रस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने कांगे्रस की नीतियों पर विश्वास व्यक्त करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में कांगे्रस पार्टी के पक्ष में कार्य कर कार्य करने का संकल्प लिया है।

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