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राजदीप सरदेसाई को बीजेपी सांसद से क्यों मांगनी पड़ी माफी

नई दिल्ली 16 अक्टूबर 2019 । सोशल मीडिया पर ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई की माफी चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने भाजपा सांसद प्रो.राकेश कुमार सिन्हा से माफी मांगी है। हालांकि, गौर करने वाली बात ये है कि राजदीप जिस गलती के लिए माफी मांग रहे हैं, वो उन्होंने की ही नहीं। दरअसल, मीडिया समूह की ऑनलाइन टीम ने राकेश सिन्हा के बयान को एक ऐसे रूप में पेश कर दिया, जिनसे वह नाराज हो गए। जब यह बात राजदीप के ध्यान में लाई गई तो उन्होंने बिना कोई स्पष्टीकरण दिए माफी मांग ली। एक अच्छे लीडर की यही पहचान होती है और इसके लिए राजदीप की सराहना की जानी चाहिए।

पूरा माजरा कुछ यूं है कि कुछ वक्त पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ‘लिंचिंग’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि लिंचिंग पश्चिमी तरीका है और देश को बदनाम करने के लिए भारत के संदर्भ में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसी विषय पर इंडिया टुडे समूह के अंग्रेजी न्यूज चैनल ने एक डिबेट शो आयोजित किया था, जिसमें राकेश सिन्हा भी बतौर अतिथि उपस्थित थे। शो के दौरान राजदीप ने सवाल दागा कि अपराध, अपराध है फिर मोहन भागवत लिंचिंग को विदेशों से जोड़कर क्या कहना चाहते हैं? जिस पर सिन्हा ने संघ प्रमुख के बयान का समर्थन करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने इस्लामिक देशों का भी हवाला दिया, जहां बलात्कार और चोरी आदि के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।

उनके बयान को इंडिया टुडे के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन इसका जो अंदाज था वो सिन्हा को पसंद नहीं आया। इसी बात को लेकर उन्होंने ट्विटर पर राजदीप सरदेसाई को टैग करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने लिखा ‘दुष्प्रचार करने वालों से मुंह नहीं लड़ाता हूं। पढ़ने-लिखने का समय ही कम पड़ता है. @sardesairajdeep के लिंचिंग पर डिबेट में मैंने कहा कि इस्लाम में रेप ,चोरी के लिए (पत्थर मारना,हाथ काटना) सजा है, वह हमारे यहां नही है पर ट्वीट ऐसा किया गया कि भारत में रेप के लिए सजा नही है। भाव की हत्या’! सिन्हा के इस ट्वीट को अब तक 10 हजार से ज्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है।

राकेश सिन्हा की नाराजगी पर राजदीप को कोई न कोई सफाई तो देनी ही थी, लेकिन उन्होंने बिना कोई सफाई दिए गलती स्वीकारते हुए माफी मांग ली। राजदीप ने सिन्हा को जवाब देते हुए लिखा, ‘आपकी बात बिलकुल सही है.. आपके बयान को verbatim छापा गया online desk ने, जबकि आपके कहने का मतलब कुछ और था.. गलती के लिए माफी।’

हालांकि, भाजपा सांसद का गुस्सा इतने से ही शांत नहीं हुआ, उन्होंने एक और ट्वीट दागते हुए कहा, ‘राजदीप जी मेरी छवि को जो नुकसान पहुंचा है, उसके लिए आप क्या कर रहे हैं? मैंने इंडिया टुडे गेस्ट को-ऑर्डिनेटर्स को दो दिनों से लगातार कहा, पर वे लाचार दिखे।’

राजदीप ने सिन्हा का गुस्सा शांत करने का एक और प्रयास करते हुए लिखा ‘हमने संबंधित व्यक्तियों को सूचित कर दिया है। स्टोरी हटा ली गई है और माफी प्रकाशित की जाएगी’ और वह इसमें कामयाब भी रहे। राकेश सिन्हा ने राजदीप का आभार जताते हुए मामले को वहीं खत्म कर दिया।

पत्रकार आरफा खानम की आरिफ मोहम्मद खान ने यूं लगाई ‘क्लास’
एक का नाम है आरिफ और दूसरी का आरफा। आरिफ मोहम्मद खान केरल के गवर्नर हैं और आरफा खानम शेरवानी न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ की सीनियर एडिटर। आरिफ शाह बानो केस में राजीव गांधी सरकार से इस्तीफा दे चुके हैं। वह एक उदारवादी मुस्लिम माने जाते हैं और आमतौर पर हिंदुओं के खिलाफ कुछ बोला जाता है तो उसका विरोध करते हैं, जबकि आरफा मुस्लिमों से जुड़े मुद्दों को काफी प्रमुखता से उठाती हैं और उनके निशाने पर संघ परिवार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होते हैं। ऐसे में लगातार यह तीसरी भिड़ंत है दोनों के बीच में, लेकिन इस बार आरफा के ट्वीट पर आरिफ ने जो लिखा, आरफा उस पर अब तक खामोश हैं।

आरिफ जब तक केरल के गवर्नर नहीं बने थे, तब द वायर की तरफ से आरफा खानम ने उनका इंटरव्यू किया था। वह इंटरव्यू बहुत ज्यादा हिट रहा, उसकी वजह थी आरफा के जितने सवाल आए मोदी सरकार में बढ़ती असहिष्णुता पर और मुसलमानों की स्थिति पर, आरिफ मोहम्मद ने अपने तर्कों से एक-एक करके उनको खारिज कर दिया। तब संघ परिवार से जुड़े और हिंदूवादी लोगों ने आरिफ मोहम्मद‌‌ के इस इंटरव्यू को सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया। दोनों ही मुस्लिम थे। एक कुछ और जुबान बोल रहा था, दूसरा कुछ और। ऐसे में आरिफ मोहम्मद का इंटरव्यू काफी चर्चा में रहा था।

‌आरिफ मोहम्मद ने दूसरी बार आरफा को तब निशाने पर लिया, जब आरफा ने एक ट्वीट किया कि इसी देश में एपीजे कलाम हैं और इसी देश के हामिद अंसारी हैं लेकिन हामिद अंसारी की बजाय एपीजे कलाम की इतनी प्रशंसा क्यों होती है और दूसरे की इतनी बुराई। एनडीए सरकार ने कलाम को राष्ट्रपति बनाया था, जबकि अंसारी से संघ परिवार की नजदीकियां कभी नहीं रही है। ऐसे में आरिफ मोहम्मद खान ने एक ट्वीट किया और उसको उन्होंने अपनी प्रोफाइल पर पिन भी कर रखा है। उन्होंने आरफा को इस ट्वीट का जवाब दिया कि एपीजे कलाम भारतीय पहले थे और मुस्लिम बाद में. जबकि अंसारी मुस्लिम पहले थे और भारतीय बाद में। आरफा खान ने अब तीन ट्वीट्स में अपनी बात रखी है और मुद्दा है कि कुछ मुस्लिमों ने अयोध्या की विवादित जमीन को हिंदुओं को सौंपने की सिफारिश की है, चाहे मुकदमे का फैसला किसी के भी हक में जाए। ऐसे में आरफा ने लिखा है.’ इससे बड़ा बेतुका कुछ और नहीं हो सकता कि कुछ लोग विवादित जमीन को हिंदुओं को सौंपने की बात कर रहे हैं। यह एक तरह से शर्मनाक स्वीकारोक्ति होगी कि इस देश में जुडिशरी और रूल ऑफ लॉ की हत्या हो गई है। मुस्लिम सेकंड क्लास सिटीजन बनकर रह जाएंगे, बहुसंख्यक गुंडों के कृपा पर जिएंगे, इससे उनकी जिंदगी सुरक्षित नहीं बनेगी बल्कि और दयनीय हो जाएगी। हम सभी को भले ही फैसला किसी के हक में आए, कानून का सम्मान करना चाहिए लेकिन अगर भारत को सेकुलर रहना है तो बाबरी मस्जिद को तोड़ने वालों को सजा मिलनी चाहिए।’

आरफा के इस ट्वीट को देखकर आरिफ मोहम्मद खान एक बार फिर से भड़क गए और उन्होंने एक कड़ा ट्वीट किया है। आरफा का ट्वीट शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘लोगों को सावधान रहना चाहिए, पत्रकारिता के वेश में तुम जैसे लोग रिलीजियस हिस्टीरिया फैलाने का, उन्माद जगाने का काम कर रहे हैं।’ आरिफ ने आगे लिखा, ‘तुम्हारा कोई मुकाबला नहीं है, जहर उगलकर सोसाइटी की शांति को खत्म करने में।‘ अभी तक आरिफ मोहम्मद के ट्वीट पर आरफा ने कोई रिप्लाई नहीं दिया है।

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