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‘नष्ट हो जाएगी काशी, शिव के वास्तु से खेल रही है सरकार

काशी 11 जुलाई 2018 । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अपने संसदीय क्षेत्र काशी को क्योटो बनाने की बात कही तब काशी को जानने और समझने वालों के ज़ेहन में यह सवाल बार-बार आया कि इतिहास से भी पुरानी नगरी काशी को कोई 600 साल पुराने इतिहास वाले क्योटो के समान क्यों बनाना चाहता है? क्या यह घोषणा सोच समझकर की गई या इसके पीछे सिर्फ काशी और क्योटो की शाब्दिक तुकबंदी भर थी ?

काशी को क्योटो बनाने के इसी क्रम में काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण के लिए बनारस के ललिता घाट से विश्वनाथ मंदिर तक दो सौ से अधिक भवन चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें तोड़ा जा रहा है. इनमें लगभग 50 की संख्या में प्राचीन मंदिर व मठ शामिल हैं. ये सभी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की ज़द में आने वाले मंदिर हैं.इन प्राचीन मंदिरों, देव विग्रहों की रक्षा के लिए आंदोलनरत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 12 दिन के उपवास पर बैठे हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि काशी का पक्का महाल ऐसे वास्तु विधान से बना है जिसे स्वयं भगवान शिव ने मूर्तरूप दिया था. ऐसे में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के कारण पक्का महाल के पौराणिक मंदिरों और देव विग्रहों को नष्ट करने से काशी ही नष्ट हो जाएगी.

नष्ट हो जाएगी काशी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का aajtak.in से खास बातचीत में कहना है कि पक्का महाल ही काशी का मन, मस्तिष्क और हृदय है. पक्का महाल ऐसे वास्तु विधान से बना है जिसे स्वयं भगवान शिव ने मूर्तरूप दिया था. ऐसे में इसके नष्ट होने से काशी के नष्ट होने का खतरा है. यह सिर्फ काशी के एक हिस्से पक्का महाल या यहां रहने वालों की बात नहीं है बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की आस्था का प्रश्न है. देश के अलग-अलग हिस्सों से पुराणों/ग्रंथों में पढ़कर लोग अपने आराध्य देवी-देवताओं के दर्शन करने काशी आते हैं. ऐसे में जब वे काशी आएंगे तब जरूर पूछेंगे कि उनके देवी देवता कहां गए?

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