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बांसुरी स्वराज क्या अपनी मां के अधूरे सपनों को पूरा करेंगी, क्या वे सक्रिय राजनीति में आएंगी

नई दिल्ली 15 अगस्त 2019 । देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज ने अपनी मां सुषमा स्वराज की प्रार्थना सभा में कुछ ऐसी यादें शेयर की कि सभा में मौजूद हर शख़्स भावुक हो गया। बांसुरी स्वराज का उद्बोधन इतना प्रभावी था कि एकबार तो ऐसा लगा कि खुद सुषमा स्वराज बोल रही हैं। बांसुरी स्वराज के दो मिनट के उद्बोधन में वही अंदाज, वही मधुरता, वही आत्म विश्वास नजर आया जो स्व.सुषमा स्वराज में नजर आया करता था। दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में दिवंगत भाजपा नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज लिए प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इस प्रार्थना सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा व विभिन्न दलों के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। प्रार्थना सभा में मौजूद सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज ने अपनी मां को याद करते हुए कहा कि मैं धन्य हूं जो उनकी बेटी हूं। अपनी मां को याद करते हुए सभा में आए सभी लोगों को संबोधित करते हुए बांसुरी ने कहा कि उनकी मां सुषमा स्वराज के 42 वर्षों की राजनीतिक यात्रा में सभी लोगों का कुछ ना कुछ योगदान रहा हैं मैं उन सभी का आभार व्यक्त करती हूं। बांसुरी ने भारतीय जनता पार्टी का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि पार्टी ने उनकी मां को बहुत ऊपर का और सम्मानीय दर्जा दिया। बांसुरी ने कहा मैं जानती हूं कि आज यहां उन्हें याद करने के लिए जितने लोग मौजदू हैं, उनमें से काफी लोग ऐसे हैं, जिन्होंने उनकी ममता को दिल से महसूस किया है। आज इस प्रार्थना सभा में लोग केवल हमारे दुख में शामिल होने नहीं आए हैं, बल्कि उन्हें भी उतना ही दुख है, जितना हमें है। लोग हमारी ही तरह इस दुख को महसूस कर रहे हैं। सुषमा स्वराज बहुत बहादुर थीं, अगर वो संसद में शेरनी की तरह दहाड़ती थीं तो एक मासूम बच्चे की तरह उनके चेहरे पर हंसी भी होती थी। बांसुरी ने संकट की घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का भी धन्यवाद किया। उल्लेखनीय है कि सुषमा स्‍वराज की भगवान श्रीकृष्‍ण में अटूट श्रद्धा थी। वो चाहती थीं कि भगवान की तरह ही वो कई रूपों में अपनी भूमिका निभाएं, इसीलिए उन्‍होंने अपनी बेटी का नामकरण काफी सोच-समझकर बांसुरी रखा। दरअसल जिस तरह भगवान कृष्ण को उनकी बांसुरी बहुत प्रिय थी, ठीक उसी तरह सुषमा स्वराज को भी अपनी बेटी बहुत प्रिय थी। बांसुरी स्वराज सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। इनर टेम्पल से कानून में बैरिस्टर की डिग्री लेने के बाद अपने पिता की तरह क्रिमिनल लॉयर हैं। ज्ञातव्य है कि पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने साल 1975 में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील स्वराज कौशल से शादी की। स्वराज कौशल तीन साल तक मिजोरम के गवर्नर भी रहे। गौरतलब है कि बांसुरी स्वराज एक ऐसी प्रखर वक्ता हैं कि उनमें सुषमा स्वराज की छवि नजर आती है। प्रार्थना सभा में उनके उद्बोधन के बाद भाजपा नेताओं की निगाह उनपर टिक गई है, उन्हें सुषमा स्वराज की परछाई के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में शोक खत्म होने के बाद क्या भाजपा बांसुरी स्वराज को सक्रिय राजनीति में आने का प्रस्ताव रखेगी, क्या बांसुरी अपनी मां के अधूरे सपनों को पूरा करेगी यह सभी अभी सवाल है !

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