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इनकम टैक्स में राहत मिलेगी या नहीं? आज खुलेगा फाइनेंस मिनिस्टर का पिटारा

नयी दिल्ली 1 फरवरी 2022 । नौकरी-पेशा करने वाले लोग बजट से राहत की आस लगाए बैठे हैं। उन्हें उम्मीद है कि फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण, बजट 2022 (Budget 2022) में इनकम टैक्स में कुछ बड़ी राहत देंगी। लोगों को इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव और इनकम टैक्स रेट्स घटाए जाने की उम्मीद है। फाइनेंस मिनिस्टर बजट में वर्क फ्रॉम होम डिडक्शन या स्टैंडर्ड डिडक्शन लिमिट में बढ़ोतरी से जुड़ी घोषणा कर सकती हैं। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 80,000 रुपये किया जा सकता है। क्या सेक्शन 80C की लिमिट में होगी बढ़ोतरी
सेक्शन 80C के तहत लाइफ इंश्योरेंस, हाउसिंग लोन के प्रिंसिपल रीपेमेंट, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट, टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड्स, प्रॉविडेंट फंड, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड और बच्चों की ट्यूशन फीस पर टैक्स डिडक्शन मिलता है। हर फाइनेंशियल ईयर में इसकी लिमिट 1.5 लाख रुपये है। पिछली बार यह लिमिट वित्त वर्ष 2014-15 में बढ़ाई गई थी। इससे पहले 80C के तहत 1 लाख रुपये का टैक्स डिडक्शन मिलता था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सेक्शन 80C की लिमिट में बढ़ोतरी होती है तो आम लोग ज्यादा बचत करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। क्या बेसिक पर्सनल टैक्स इग्जेम्शन लिमिट में होगा बदलाव?
पिछली बार बेसिक पर्सनल टैक्स इग्जेम्शन लिमिट में साल 2014 में बदलाव किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार का पहला बजट पेश करते हुए उस समस के फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बेसिक पर्सनल टैक्स इग्जेम्शन लिमिट को 2 लाख रुपये बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया था। सीनियर सिटीजंस के लिए इग्जेम्शन लिमिट को 2.5 लाख रुपये से 3 लाख रुपये किया गया था। तब से लेकर अभी तक बेसिक इग्जेम्शन लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

टैक्स इग्जेम्शन लिमिट में मिल सकती है राहत
कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि फाइनेंस मिनिस्टर टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दे सकती हैं। बेसिक टैक्स इग्जेम्शन लिमिट को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जा सकता है। वहीं, सीनियर सिटीजंस के लिए इग्जेम्शन लिमिट को 3 लाख से बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये किया जा सकता है। कोरोना महामारी और अर्थव्यवस्था में मजबूती लाने की चुनौती के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में वित्त वर्ष 2022-23 का आम बजट पेश करेंगी। इस बजट में टैक्स छूट, बचत सीमा में बढ़ोतरी और स्वास्थ्य समेत आम आदमी से जुड़ी बड़ी घोषणाएं होने की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री नौकरीपेशा करदाताओं को कई सौगातें दे सकती हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं कि वित्त मंत्री कौन-कौन सी घोषणाएं कर सकती हैं। वर्क फ्रॉम होम खर्च पर टैक्स छूट

कोरोना के दौरान बड़ी संख्या में कंपनियों ने घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) को प्राथमिकता दी थी। इसके लिए कर्मचारियों ने घर पर ऑफिस बनाया था। कई कंपनियों ने ऑफिस से जुड़ा सामान जैसे कुर्सी, मेज, इंटरनेट, लैपटॉप-डेस्कटॉप खुद मुहैया कराया था, जबकि कुछ कंपनियों ने ऐसे सामान की खरीद पर री-इंबर्समेंट दिया था। जानकारों के अनुसार, रि-इंबर्समेंट पर अभी कोई टैक्स छूट नहीं है। ऐसे में वित्त मंत्री वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों को 50 हजार रुपए के डिडक्शन का विकल्प दे सकती हैं।

टैक्स स्लैब में बदलाव

60 साल से कम उम्र के व्यक्तियों के लिए अभी 2.5 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। इस सीमा में वित्त वर्ष 2014-15 से कोई बदलाव नहीं हुआ है। जानकारों का कहना है कि लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा देने के लिए सरकार टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर सकती है। इससे करदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी की भी संभावना है। इसके अलावा आयकर के दोनों विकल्पों में टैक्स की दरों में बदलाव भी किया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने 2.5 लाख रुपए से लेकर 5 लाख तक की आय पर लगने वाले टैक्स में छूट दे रखी है। एलटीसी स्कीम की वापसी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मांग में तेजी लाने के लिए अक्टूबर 2020 में यात्रा भत्ता कैश वाउचर स्कीम लॉन्च की थी। इसके तहत कर्मचारियों को बिना यात्रा किए एलटीसी क्लेम करने और टैक्स में छूट की मंजूरी दी गई थी। यह स्कीम 31 मार्च 2021 तक लागू थी। कोरोना की तीसरी लहर पर काबू पाने के लिए कई राज्य सरकारों ने यात्रा प्रतिबंध लगा रखे हैं। इस कारण नौकरीपेशा अपनी पसंद की जगहों पर यात्रा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री इस स्कीम को दो साल के लिए और बढ़ाकर 31 मार्च 2023 तक के लिए बढ़ा सकती हैं।

ज्यादा पीएफ योगदान पर टैक्स में सुधार फाइनेंस एक्ट 2021 में प्रोविडेंट फंड (पीएफ) में 2.5 लाख से ज्यादा का योगदान देने वालों को टैक्स के दायरे में लाया गया था। इन लोगों को उच्च आय वर्ग का मानते हुए पीएफ से निकासी और बोनस पर टैक्स लगाया गया था। इसके संबंध में हाल ही में सरकार की ओर से स्पष्टीकरण भी जारी किया गया था। जानकारों का कहना है कि इससे नौकरीपेशा पर दोहरा कर बोझ पड़ता है। सरकार आगामी बजट में दोहरे कर से बचाने के लिए संबंधित अधिनियम के तहत प्रासंगिक अनुसूची में संशोधन कर सकती है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2018-19 में नौकरीपेशा को राहत देने के लिए 50 हजार रुपए के एकमुश्त स्टैंडर्ड डिडक्शन की घोषणा की गई थी। इसको मेडिकल री-इंबर्समेंट और ट्रेवल अलाउंस के रूप में मिलने वाले पैसे को छूट के रूप में देखा गया था। तब से लेकर अभी तक इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। अब कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य खर्च बढ़ गया है। ऐसे में सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर सकती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ नई वैकल्पिक टैक्स प्रणाली में भी मिलता है। 80सी में टैक्स छूट में बढ़ोतरी

आयकर अधिनियम 1961 के सेक्शन 80सी में विभिन्न प्रकार के निवेश और खर्चों पर टैक्स छूट का प्रावधान है। अभी 80सी के तहत 1.50 लाख रुपए तक के निवेश-खर्च पर टैक्स में छूट है। मौजूदा आर्थिक हालातों को देखते हुए अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए सरकार 80सी के तहत टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपए तक कर सकती है। 80सी के तहत कर्मचारी भविष्य निधि, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, हाउसिंग लोन के मूलधन भुगतान, बच्चों की ट्यूशन फीस, राष्ट्रीय बचत पत्र में निवेश पर खर्च किए गए 1.50 लाख रुपए टैक्स छूट मिलती है।

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