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अटल जी को श्रद्धांजलि के साथ विश्व हिंदी सम्मेलन का आगाज

नई दिल्ली 19 अगस्त 2018 । मारीशस की राजधानी पोर्ट लुई में ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन का आगाज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के बाद हुआ। इस कार्यक्रम में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के अलावा मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार भी मौजूद थे। सम्मेलन का आगाज करने से पहले सभी ने मौन रखकर अटल जी को श्रद्धांजलि दी। सम्मेलन की आयोजन समिति के एक सदस्य ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य विषय हिंदी विश्व और भारतीय संस्कृति है। इसमें भाग लेने के लिए भारत से केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू, मानव संसाधन राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह शुक्रवार को भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ विशेष विमान से पहुंच चुके हैं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अलावा 38 देशों के प्रतिभागी भी सम्मेलन में भाग लेने के लिए पोर्ट लुई पहुंच चुके हैं। इसके पहले 1976 और 1993 में पोर्ट लुई में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा चुका है। ये तीसरा मौका है जब यह सम्मेलन पोर्ट लुई में हो रहा है। सम्मेलन का आयोजन ‘स्वामी विवेकानंद अंतराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र’ में हो रहा है।

इसको ‘गोस्वामी तुलसीदास नगर’ का नाम दिया गया है। आयोजन स्थल के मुख्य सभागार और समांतर सत्र के कक्षों का नाम भारत और मारीशस के प्रमुख साहित्यकारों के नाम पर रखे गए हैं। हाल ही में दिवंगत हुए साहित्यकार अभिमन्यु अनत, गोपालदास नीरज के अलावा भानुमति नागदान और सुरुज प्रसाद मंगर ‘भगत’ जैसे हिंदी सेवियों के नाम शामिल हैं।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, पंडित नरेंद्र देव वेदालंकार के नामों को भी प्रमुखता दी गई है। अटल जी को श्रद्धांजलि देने के बाद एक विशेष सत्र होगा ‘भोपाल से मारीशस’ तक जिसमें भोपाल में आयोजित दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन की अनुशंसाओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

अटल जी नाम से जाना जाएगा मॉरीशस का साइबर टॉवरः पीएम जगन्नाथ

मारीशस। मारीशस की राजधानी पोर्ट लुई में ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन का आगाज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के बाद हुआ। इस कार्यक्रम में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के अलावा मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार भी मौजूद थे। सम्मेलन का आगाज करने से पहले सभी ने मौन रखकर अटल जी को श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद सम्मेलन को संबोधित करते हुए मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने कहा कि मॉरीशस में जिस साइबर टॉवर को तैयार करने में अटल जी ने योगदान दिया उसे अब अटल बिहारी वाजपेयी टॉवर के नाम से जाना जाएगा।सम्मेलन की आयोजन समिति के एक सदस्य ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य विषय हिंदी विश्व और भारतीय संस्कृति है। इसमें भाग लेने के लिए भारत से केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू, मानव संसाधन राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह शुक्रवार को भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ विशेष विमान से पहुंच चुके हैं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अलावा 38 देशों के प्रतिभागी भी सम्मेलन में भाग लेने के लिए पोर्ट लुई पहुंच चुके हैं। इसके पहले 1976 और 1993 में पोर्ट लुई में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा चुका है। ये तीसरा मौका है जब यह सम्मेलन पोर्ट लुई में हो रहा है। सम्मेलन का आयोजन ‘स्वामी विवेकानंद अंतराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र’ में हो रहा है।

इसको ‘गोस्वामी तुलसीदास नगर’ का नाम दिया गया है। आयोजन स्थल के मुख्य सभागार और समांतर सत्र के कक्षों का नाम भारत और मारीशस के प्रमुख साहित्यकारों के नाम पर रखे गए हैं। हाल ही में दिवंगत हुए साहित्यकार अभिमन्यु अनत, गोपालदास नीरज के अलावा भानुमति नागदान और सुरुज प्रसाद मंगर ‘भगत’ जैसे हिंदी सेवियों के नाम शामिल हैं।

कई राज्यों की नदियों में प्रवाहित होंगी अटल जी की अस्थियां, शाह रहेंगे मौजूद

अटल जी के अंतिम संस्कार के बाद अब उनकी अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया होगी। इसके लिए हरिद्वार को चुना गया है और रविवार को अटल जी की अस्थिया गंगा में प्रवाहित की जाएंगी। प्रशासन ने इसके लिए सारे इंतजाम कर लिए हैं। जानकारी के अनुसार अस्थि विसर्जन के दौरान यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अलावा कई बड़े नेता व खुद प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद रह सकते हैं।

पुलिस व प्रशासनिक अमला अस्थि विसर्जन की तैयारियों में जुट गया है। प्रशासन को अभी तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम प्राप्त हो चुका है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व गृह मंत्री राजनाथ सिंह के हरिद्वार आने की भी सूचना मिली है। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि विसर्जन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने का विधिवत कार्यक्रम प्राप्त हो चुका है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आने की सूचना भी मिल रही है। कई और वीआईपी हरिद्वार पहुंचने की उम्मीद है। उसी के अनुसार सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं की तैयारियां की जा रही हैं।

हरिद्वार के अलावा यूपी सरकार ने भी फैसला किया है कि राज्य के 75 जिलों की सभी नदियों में अटल जी की अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश, अटल जी की कर्मभूमि रहा है। उनका यहां से गहरा लगाव था और जन भावनाओं का सम्मान करते हुए अटल जी की अस्थियों का राज्य की हर नदी में विसर्जन किया जाएगा।

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