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वाह! क्या शब्द है — विलफुल डिफाल्टर !!

नई दिल्ली 22 नवम्बर 2019 । आरबीआई ने 30 विलफुल डिफाल्टरों की सूची जारी कर दी। इसमें वे कंपनियाँ हैं जो देश की बैंकों का अरबों रुपया खाकर बैठी हैं। ये कंपनियां चाहती तो बैंकों का कर्ज़ा लौटा सकती थीं, पर उनकी नीयत ठीक नहीं थी।
इंदौर का नाम जिन्होंने ‘रोशन’ किया वे तीन बड़े चोट्टे हैं – रूचि सोया 3225 करोड़, ज़ूम डेवलपर्स 2024 करोड़ और एस कुमार्स 1581 करोड़ रुपये। (इंदौर के और भी होंगे, पर इस सूची में शायद नहीं हैं).

इन 30 कंपनियों में तीन कंपनियां भगोड़े डायमंड व्यापारी मेहुल चौकसी से जुड़ी हैं। इनमें कुल तकरीबन 50 हजार करोड़ रुपये की राशि शामिल है, जिसे बैंक ने माफ कर दिया है। इसको और अगर सही रूप में पेश किया जाए तो दिसंबर 2018 तक तकरीबन 11,000 कंपनियां विलफुल डिफाल्टर की सूची में आ गयी हैं। और इस हिसाब से यह राशि तकरीबन एक लाख 61 हज़ार करोड़ है।

इस डाटा में विलफुल डिफाल्टरों के एकाउंट के बैड लोन और एनपीए का डाटा शामिल नहीं है।

इसमें बहुत सारी वही कंपनियां शामिल हैं जिनके नाम तत्कालीन आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने पीएमओ को भेजे थे और उससे उनके खिलाफ कार्रवाई करने और जनता के रुके हुए पैसों को वसूलने की मांग की थी।

इनमें से कुछ के ही खिलाफ जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की। और उनकी संपत्तियों को जब्त किया।

वित्तमंत्री द्वारा संसद में दिए गए एक आंकड़े के मुताबिक 2018-19 तक देश के सरकारी बैंकों का कम से कम एक हज़ार पांच सौ अरब रूपये या डेढ़ लाख करोड़ रुपये की राशि विलफुल डिफाल्ट की सूची में है। इसमें सबसे बड़ी राशि स्टेट बैंक की है जो पूरी राशि का तकरीबन एक तिहाई है।

बैंकों के अलग-अलग हिस्से के हिसाब से एसबीआई का कुल 461.58 अरब , पीएनबी का 25.9 अरब और बैंक आफ इंडिया का 98.9 अरब रुपया विलफुल डिफाल्टर मद में सूचीबद्ध है। आरबीआई के मुताबिक 31 मार्च, 2019 तक सभी बैंकों की यह राशि 638.2 अरब रुपये हैं।

आरबीआई ने ऐसा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया है। इसके लिए 2016 में एक आरटीआई दायर की गई थी। लेकिन आरबीआई यह कहते हुए सूची देने से मना कर दिया था कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

मामला सुप्रीम कोर्ट गया और कई सुनवाइयों के बाद कोर्ट ने सेंट्रल बैंक को डिफाल्टरों की सूची सार्वजनिक करने का निर्देश जारी कर दिया। झख मारकर आरबीआई को सूची उजागर करनी पड़ी।

हिंदी में जिन ‘सज्जनों’ को हम चोर, चोट्टा, अमानत में खयानत करनेवाला, गबनकर्ता, जेबकतरा, लुंठन, डाकू आदि-आदि घटिया शब्दों से पुकारते हैं, अंग्रेजी में, खासकर बैंकों की अंग्रेज़ी में उनके लिए एक से बढ़कर एक शब्द उपलब्ध हैं, लेकिन जो मज़ा ‘विलफुल डिफाल्टर’ में है, वह कहीं नहीं ! क्या गजब के 2 शब्द हैं। बेहद इज्जतदार! लज्जतदार!! विलफुल डिफाल्टर शब्दों में गरिमा है। विलफुल डिफाल्टर बोलो तो लगता है कि टॉम क्रूज टाइप किसी जीव की चर्चा हो रही है!

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