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गुपचुप सौदेबाज़ी की ख़बरों पर ‘Zee समूह’ ने दिया ये जवाब

नई दिल्ली 09 अक्टूबर 2019 । ‘Zee समूह’ ने गुपचुप सौदेबाजी के आरोपों से इंकार किया है और ऐसी ख़बरों को बेबुनियाद बताया है कि उसने रूस की कंपनी वीटीबी कैपिटल के पास हाल ही में अपनी 10.71% हिस्सेदारी गिरवी रखी है।

समूह के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका ने कहा 8.7 प्रतिशत हिस्सेदारी ‘इन्वेस्को’ को बेचने के बाद प्रमोटरों की कंपनी में हिस्सेदारी 22 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा प्रमोटरों ने न कोई अतिरिक्त कर्जा लिया है और न हिस्सेदारी गिरवी रखी गई है। उन्होंने आगे कहा, ‘Zee के शेयर 2017 के स्ट्रक्चर्ड अरेंजमेंट के तहत वीटीबी कैपिटल के पास गिरवी नहीं रखे गए और ऋण राशि हमेशा से ही शेयरों के बदले मिले ऋण में शामिल रही है।’

दरअसल, यह सारा विवाद वीटीबी कैपिटल द्वारा सेबी के समक्ष प्रदान की गई जानकारी से हुआ है, जिसमें कहा गया है कि ‘ज़ी समूह’ के प्रमोटरों ने अपनी 10.71% हिस्सेदारी वीटीबी के पास गिरवी रखी है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया है कि एस्सेल मीडिया वेंचर के स्वामित्व वाले ‘ज़ी समूह’ के 10.2 करोड़ शेयरों पर ऋणभार 4 सितंबर को निष्पादित ऋण समझौते के अनुसार है। मालूम हो कि सेबी ने शेयर गिरवी रखने से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं, जो एक अक्टूबर से अमल में आये हैं। इसके तहत यदि गिरवी रखे जा रहे शेयर प्रोमोटरों की कुल हिस्सेदारी के बराबर या उससे 50 फीसदी अधिक हैं या कंपनी की कुल शेयर कैपिटल का 20 प्रतिशत हैं तो इसके कारणों के बारे में विस्तार से सेबी को बताना होगा। 30 जून, 2019 तक प्रमोटरों के पास कंपनी की लगभग 35.79 फीसदी हिस्सेदारी थी, जो अब घटकर 22% रह गई है।

गौरतलब है कि सुभाष चंद्रा के नेतृत्व वाला एस्सेल समूह आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और कर्जा चुकाने के लिए हिस्सेदारी बेची जा रही है। बीच में ऐसी ख़बरें भी सामने आईं थीं कि 1992 में शुरू हुए ‘जी समूह’ को डूबने से बचाने के लिए मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस आगे आ सकती है। रिलायंस एस्सेल समूह की आधे से ज्यादा हिस्सेदारी खरीद सकती है। इसके अलावा, जी ग्रुप की हिस्सेदारी खरीदने के लिए अमेजन, एप्पल, टेनसेंट, अलीबाबा, एटीएंडटी, सिंगटेल, कोमकास्ट व सोनी पिक्चर्स नेटवर्क ने भी रुचि दिखाई थी।

इसी साल अगस्त में एस्सेल समूह ने ‘ज़ी’ की 11 हिस्सेदारी 4,224 करोड़ में इन्वेस्को को बेचने पर सहमति दर्शाई थी, ताकि कर्ज चुकाया जा सके। अब तक ‘जी समूह’ को कर्ज देने वालों में जिन वित्तीय संस्थानों का नाम सामने आया है, जिसमें वीटीबी का कहीं जिक्र नहीं था। लिहाजा एकदम से यह नाम उजागर होने से हंगामा खड़ा हो गया है, हालांकि कंपनी ने ऐसे सभी आरोपों से इंकार मामले को ठंडा करने का प्रयास किया है।

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